Adhyaya 61
Patala KhandaAdhyaya 610

Adhyaya 61

The Fall (Feigning/Collapse) of Hanumān

राम-अश्वमेध के प्रसंग में शत्रुघ्न यह जानने निकलते हैं कि यज्ञ का अश्व किसने पकड़ा है। वे वाल्मीकि-आश्रम के निकट पहुँचते हैं, जहाँ क्षत्रियों की उपस्थिति को अनुचित बताया गया है। वहीं लव निर्भय होकर आगे बढ़ती संयुक्त सेना का सामना करता है, प्रचण्ड बाण-वर्षा से बहु-वलय व्यूह को तोड़ देता है। पुष्कल लव को ललकारता है और रथ देने का प्रस्ताव करता है; पर लव धर्म का स्मरण कर उसे अस्वीकार करता है—युद्ध के लिए दान लेना पाप और क्षत्रिय-धर्म के विरुद्ध है। वह पुष्कल का रथ चूर कर उसे पराजित कर देता है। तब हनुमान (मारुति) वृक्षों और शिलाओं से आक्रमण करते हुए युद्ध में उतरते हैं, किन्तु लव के तीक्ष्ण बाणों से रोके जाते हैं और अंत में गिर पड़ते हैं—इसे वरदान के कारण मूर्छा या कपट-पतन कहा गया है। अध्याय का उपसंहार ‘हनुमान का पतन’ नाम से होता है।

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