Adhyaya 54
Patala KhandaAdhyaya 540

Adhyaya 54

The Binding of the Horse by Lava

राम के अश्वमेध यज्ञ के समय जानकी-पुत्र लव ऋषियों के पुत्रों के साथ समिधा लाने वन में जाता है। वहाँ वह स्वर्ण-पट्टिका से चिह्नित, दिव्य सुगन्धियों से अभिषिक्त, दीक्षित यज्ञ-अश्व को देखता है। आश्रमवासी उसके आने का कारण पूछते हैं; लव पास जाकर पट्टिका पर लिखी घोषणा पढ़ता है, जिसमें सूर्यवंश की महिमा और राम के यज्ञ का प्रयोजन बताया गया है। इसी बीच कुछ लोगों की चुनौती और गर्वोक्तियाँ सुनकर—जो राम और शत्रुघ्न का तिरस्कार करती हैं—लव क्रोधित हो उठता है। वह ऋषिपुत्रों की चेतावनी की परवाह न करके अश्व को बाँध देता है। शत्रुघ्न के सेवक अश्व छुड़ाने आते हैं, पर लव बाणों से प्रहार कर उनके भुजाएँ काट देता है। वे जाकर शत्रुघ्न को समाचार देते हैं; इससे अश्वमेध-विवाद का अगला उग्र चरण, राजसत्ता, धर्म और बाल-क्षत्रिय-वीर्य की सीमा-परीक्षा के रूप में, उपस्थित होता है।

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