Adhyaya 53
Patala KhandaAdhyaya 530

Adhyaya 53

The Meeting with Raghunātha (Śrī Rāma)

राम-अश्वमेध के प्रसंग में रणभूमि पर बिखरी हुई सेनाओं के बीच सुग्रीव का सामना राजा सुरथ से होता है। सुरथ तीखे बाणों से प्रत्युत्तर देता है, पर सुग्रीव अद्भुत बल दिखाकर “राम” नामक भयानक अस्त्र से उसे आहत कर बाँध देता है और फिर उसे श्रीराम का सेवक जान लेता है। हनुमान आदि भी बँधे हुए और पीड़ित दिखते हैं; सभा में उपदेश होता है कि रघुनाथ का स्मरण ही एकमात्र उद्धारक है। समीरज हनुमान अत्यन्त भक्ति से रामचन्द्र की प्रार्थना करते हैं। तब श्रीराम पुष्पक विमान से लक्ष्मण, भरत और व्यास-प्रमुख ऋषियों सहित शीघ्र आते हैं, हनुमान को मुक्त करते हैं और अपनी दृष्टि से गिरे हुए वीरों को पुनर्जीवित कर देते हैं। सुरथ दण्डवत् प्रणाम कर राज्य अर्पित करना चाहता है; अश्वमेध के घोड़े की रक्षा में क्षत्रिय-धर्म निभाने के लिए उसकी प्रशंसा कर आशीर्वाद दिया जाता है। आगे शत्रुघ्न और सेना के साथ अश्वमेध की यात्रा बढ़ती है और कथा वाल्मीकि-आश्रम की ओर अग्रसर होती है।

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