Adhyaya 48
Patala KhandaAdhyaya 480

Adhyaya 48

The Liberation of the Horse (Haya-nirmukti)

इस अध्याय में कर्म की जटिलता पर आश्चर्य से आरम्भ करके पापकर्मों और उनके फलों का क्रमबद्ध वर्णन किया गया है। तामिस्र, अन्धतामिस्र, रौरव, महाराौरव, कालसूत्र, अवीचि, कुम्भीपाक आदि नरकों का उल्लेख, यम के दण्ड-विधान, तथा उसके बाद नीच योनियों में जन्म और शरीर/समाज पर दिखने वाले ‘चिह्न’—जो पूर्व पाप का संकेत देते हैं—इन सबका निरूपण होता है। फिर उपदेश मोक्ष की ओर मुड़ता है—हरि/राम की स्तुति को पाप-क्षालन करने वाली पवित्र धारा कहा गया है, जबकि हरि-निन्दा शुद्धि के मार्ग को रोक देती है। अंत में राम-अश्वमेध प्रसंग में हनुमान यज्ञाश्व के पास रामकथा का पाठ करते हैं; उससे एक दिव्य प्राणी का उद्धार होता है और अश्व की उचित गति/नियति पुनः स्थापित होती है—कथा-श्रवण की मुक्तिदायिनी शक्ति प्रकट होती है।

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