Adhyaya 47
Patala KhandaAdhyaya 470

Adhyaya 47

Recital of the Curse (Cause of the Hayastambha and Release through Kīrtana)

राम के अश्वमेध का घोड़ा हेमकूट पर्वत के निकट एक अत्यन्त रमणीय उपवन में पहुँचते ही सहसा स्तम्भ-सा जड़ हो गया—हयस्तम्भ। पहरेदारों, पुष्कल और पराक्रमी हनुमान तक ने उसे हिलाने का प्रयत्न किया, पर वह तनिक भी न चला; तब सबको ज्ञात हुआ कि यह केवल बल से नहीं, किसी गूढ़ कर्मबन्धन से रुका है। शत्रुघ्न ने मंत्री सुमति से परामर्श किया। सुमति ने कहा कि किसी विवेकी महर्षि से कारण पूछना चाहिए। वे गङ्गा-स्नान से पवित्र, तप और अग्निहोत्र से दीप्त शौनक-मुनि के आश्रम पहुँचे। शत्रुघ्न ने विनयपूर्वक शौनक से हयस्तम्भ का कारण पूछा; मुनि ने पूर्वकथा—तप, अहंकार, ऋषि-शाप और राक्षसत्व की प्राप्ति—का रहस्य बताने का वचन दिया। अध्याय का मुख्य उपदेश यह है कि रामकथा का श्रवण तथा पवित्र कीर्तन शाप के प्रभाव को नष्ट कर देता है; उसी से घोड़ा मुक्त होकर पुनः धर्ममार्ग में चल पड़ता है।

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