Adhyaya 42
Patala KhandaAdhyaya 420

Adhyaya 42

Defeat/Overthrow (Parābhava): Puṣkala’s Battle and the Vīramaṇi Episode

अध्याय 42 ‘पराभव’ में अश्वमेध से जुड़ा युद्ध-प्रसंग तीव्र होता है। सेनाएँ जुटती हैं और हनुमान राजा पुष्कल की ओर बढ़ते हैं। पुष्कल हनुमान के बल को ललकारता है और वीरमणि राजा से तुलना करके अपना पराक्रम प्रकट करता है; साथ ही कथा में भक्ति का आश्वासन आता है—रघुनाथ का स्मरण शोक-सागर को सुखा देता है और श्रीराम की कृपा से दुस्तर भी तरा जा सकता है। हनुमान उतावलेपन से बचने की सीख देते हुए वीरमणि को वीर और संरक्षित बताते हैं, फिर भी रथों पर द्वंद्व आरम्भ होता है। क्षत्रिय-नीति के अनुसार आयु बनाम शक्ति, युवाओं पर दया, और मर्यादा-पालन जैसे धर्म-विचार बाणों की वर्षा के बीच उठते हैं। आगे पुराणोचित भयावह युद्ध-चित्र—योगिनियाँ, पिशाच, सियार—दिखते हैं। अंततः पुष्कल की रणनीति और भक्ति-युक्त दृढ़ता से विरोधी मूर्छित होकर पीछे हटता है, और पुष्कल की विजय वीर-रस के साथ भक्ति-भाव में स्थापित होती है।

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