Adhyaya 38
Patala KhandaAdhyaya 380

Adhyaya 38

Shatrughna’s Vision of the Yoginīs and the Recovery of the Horse (Marriage/Boons from the Waters)

वात्स्यायन की राम-गुण सुनने की अतृप्त इच्छा देखकर शेष (अनन्त) अश्वमेध का प्रसंग सुनाते हैं। रेवातीर्थ के गहरे कुंड में यज्ञ का घोड़ा अचानक लुप्त हो जाता है। शत्रुघ्न वहाँ पहुँचकर स्तब्ध सैनिकों से पूछताछ करते हैं और मंत्रियों की सलाह से हनुमान तथा पुष्कल के साथ जल में उतरकर पाताल की ओर जाते हैं। पाताल में उन्हें एक तेजस्वी नगरी दिखती है और रत्नजटित स्वर्ण-स्तंभ के पास घोड़ा बँधा मिलता है। वहाँ एक अत्यन्त शक्तिशाली स्त्री योगिनियों के साथ है; उसकी सेविकाएँ आगंतुकों को भक्षण करने की बात करती हैं। संवाद में शत्रुघ्न-पक्ष घोड़े को रामभद्र का बताकर उसे मुक्त करने की याचना करता है; संघर्ष और मोह का वातावरण बनता है। अंततः हनुमान सर्वोच्च वर माँगते हैं—जन्म-जन्म में श्रीराम की नित्य दास्य-भक्ति। देवी वरदान देती है, भविष्य के विवाह-संबंध का संकेत करती है और शत्रुघ्न को योगिनी-प्रदत्त अस्त्र प्रदान करती है। शत्रुघ्न घोड़ा लेकर रेवातट पर लौटते हैं; सेना आनंदित होती है और समस्त वृत्तांत सुनकर रेवातीर्थ की पवित्रता का स्मरण करती है।

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