Adhyaya 36
Patala KhandaAdhyaya 360

Adhyaya 36

Narration of Rāma’s Deeds (with calendrical chronology of key events)

शिष्य-भाव से किए गए प्रश्न—“आप जिस राम का ध्यान करते हैं, वे कौन हैं और वे क्यों अवतरित हुए?”—के उत्तर में लोमश बताते हैं कि श्रीराम करुणा से, दुःख में डूबे प्राणियों के उद्धार हेतु अवतरित हुए। वे रामायण की मुख्य घटनाएँ संक्षेप में कहते हैं—ताड़का-वध, अहल्या-उद्धार, विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, सीता-विवाह, वनवास, सीता-हरण, लंका-अभियान/सेतु-बंधन और अंततः रावण-वध। इस अध्याय की विशेषता यह है कि अनेक प्रसंग तिथि, पक्ष और मास के साथ अंकित हैं, जिससे कथा एक प्रकार की धार्मिक काल-पंजिका बन जाती है। अंत में भक्ति-फल बताया गया है—श्रीराम के कमल-चरणों का स्मरण और पूजन ही संसार-सागर से पार लगाने वाला साधन है। साथ ही रामाश्वमेध की रूपरेखा से पुनः संबंध जोड़ते हुए अगस्त्य का उपदेश, अश्व का एक आश्रम तक पहुँचना और अयोध्या में ऋषियों द्वारा राम-कथा का वर्णन भी कहा गया है।

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