Adhyaya 34
Patala KhandaAdhyaya 340

Adhyaya 34

Vidyunmālī and the Defeat of the Demon (Amarā/Amarā-like foe): Battle over Rāma’s Aśvamedha Horse

शेषजी वत्स्यायन से कहते हैं—रावण के पक्ष से जुड़ा राक्षस-नायक विद्युनमाली राम के अश्वमेध-घोड़े को रोकने/छीनने आए राघव-पक्ष के रक्षकों के सामने आकर प्रतिशोध की गर्जना करता है और राम के सहायकों का रक्त पीने की धमकी देता है। तब राघव-पक्ष का वीर सेवक पुष्कल क्षात्र-धर्म के अनुसार उत्तर देता है कि शौर्य का निर्णय वाणी से नहीं, शस्त्रों से होता है। इसके बाद भयंकर युद्ध छिड़ता है—भाले, त्रिशूल, गदा और बाण-वर्षा से दोनों ओर प्रहार होते हैं। पुष्कल घायल होकर मूर्छित हो जाता है। तभी हनुमान जी प्रवेश कर राक्षस-सेना का संहार करते हैं और त्रिशूल को दाँतों से काटकर चूर-चूर कर देते हैं। विध्युनमाली भयावह माया रचता है—अंधकार, रक्त-वृष्टि और कटे सिरों की वर्षा। तब शत्रुघ्न आते हैं, राम का स्मरण कर मोहनास्त्र से उस माया को नष्ट करते हैं। उनके प्रत्यस्त्रों से राक्षस भाग खड़े होते हैं; विद्युनमाली अंग-भंग होकर मारा जाता है। शेष राक्षस शरणागत होकर घोड़ा लौटा देते हैं और विजय-ध्वनि गूँज उठती है।

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