Adhyaya 29
Patala KhandaAdhyaya 290

Adhyaya 29

The Departure of Śatrughna along with Subāhu (Rāma’s Aśvamedha Cycle)

इस अध्याय में श्रीराम के अश्वमेध-यज्ञ के प्रसंग में अत्यन्त अलंकृत यज्ञ-अश्व को राजचिह्नों, सेवकों और अपार धन-वैभव सहित सजाकर आगे भेजने का वर्णन है। मार्ग में अनेक राजा और याचक विनय तथा शरणागति के स्वर में श्रीरामचन्द्र को भेंट-उपहार अर्पित करते हैं और अपने पुत्रों व अनुचरों की वापसी की प्रार्थना करते हैं। शत्रुघ्न सुबाहु सहित अन्य राजाओं को स्वीकार कर उनके निवेदन सुनते हैं। वे अश्व को पकड़ने/हड़पने से जुड़ा अपना अपराध स्वीकार कर क्षमा माँगते हैं। ग्रंथ स्पष्ट करता है कि श्रीराम देवताओं से परे परमेश्वर हैं। साथ ही क्षत्रिय-धर्म—युद्ध की तत्परता, राज्य-स्थापन, अन्त्येष्टि और शासन—को भक्ति-रस से जोड़कर राम-दर्शन की लालसा, राम-नाम की मुक्ति-शक्ति और श्रीराम के कमल-मुख के दर्शन से अयोध्या की धन्यता का गुणगान करता है।

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