
The Defeat of Subāhu (within the Rāma-Aśvamedha account)
इस अध्याय में राम-अश्वमेध प्रसंग के भीतर रणभूमि और यज्ञ का संकट उभरता है। युद्ध में एक राजा अपने गिरे हुए पुत्र को देखकर अत्यन्त विलाप करता है; अन्य पुत्र और वीर उसे शोक छोड़कर क्षत्रिय-धर्म का स्मरण कराते हैं और रण में लौटने को प्रेरित करते हैं। फिर सुभाहु हनुमान से भिड़ता है। बाण टूटते हैं, रथ पकड़े जाकर चूर किए जाते हैं, और हनुमान के प्रहार से राजा गिरकर मूर्छित हो जाता है। मूर्छा में उसे स्वप्न-दर्शन होता है—अयोध्या में श्रीराम देवताओं, ऋषियों, अप्सराओं और देहधारी वेदों द्वारा स्तुत हैं; तब उसे बोध होता है कि यह संघर्ष साधारण नहीं, दिव्य सत्ता से सामना है। होश में आकर वह पूर्व शाप और मुनि असिताङ्ग की सीख याद करता है—राम परब्रह्म हैं और सीता चिन्मयी; केवल तर्क से यह रहस्य नहीं पकड़ा जाता। अध्याय का अंत संयम, प्रतिकार-त्याग, और श्रीराम की परम स्थिति की पुनः स्वीकृति की ओर जाता है।
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