Adhyaya 27
Patala KhandaAdhyaya 270

Adhyaya 27

The Slaying of Citrāṅga

राम के अश्वमेध-प्रसंग में चित्राङ्ग रणभूमि में आगे बढ़कर भरत-पुत्र पुष्कल से भिड़ता है। दोनों के बीच तीव्र बाण-वर्षा, रथ-चातुर्य और अस्त्र-कौशल का घोर द्वंद्व होता है; पुष्कल बार-बार चित्राङ्ग के रथों को तोड़कर उसे संकट में डाल देता है। युद्ध के बीच संवाद होता है—चित्राङ्ग पुष्कल की वीरता स्वीकार कर प्रतिज्ञा करता है, जिससे संघर्ष केवल बल का नहीं, धर्म-सत्य के दावे का बन जाता है। तब पुष्कल श्रीराम-भक्ति और पतिव्रता-धर्म पर आधारित सत्य-क्रिया का आह्वान कर निर्णायक बाण छोड़ता है। शत्रु प्रत्युत्तर में अस्त्र चलाता है, पर सत्यबल से युक्त बाण चित्राङ्ग का सिर काट देता है; उसकी सेना घबरा कर भागती है और पुष्कल व्यूह में घुसकर विजय प्राप्त करता है—धर्म-समर्थ वीरता के रूप में।

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