Adhyaya 25
Patala KhandaAdhyaya 250

Adhyaya 25

The Mustering (Assembly) of Subāhu’s Army

पुराण की बहुस्तरीय कथा-रचना में शेष और वात्स्यायन के संवाद के द्वारा अश्वमेध से जुड़ा संग्राम-वृत्तांत आगे बढ़ता है। यज्ञ-अश्व के आसपास भयंकर युद्ध का समाचार पाकर सुभाहु अपने पुत्र दमन के आचरण और पराक्रम को लेकर व्याकुल हो उठता है। दमन बार-बार विजय प्राप्त करता है, पर अंततः शत्रुघ्न-पक्ष से संबद्ध एक प्रबल अस्त्र के प्रहार से वह गिर पड़ता है। इस दृश्य से सुभाहु का शोक क्रोध में बदल जाता है और वह पूर्ण सेना-संचालन का आदेश देता है। हाथी, घोड़े, रथ और पैदल—चारों अंगों वाली सेना पृथ्वी को कंपाती हुई आगे बढ़ती है; सुकेतु, चित्रांग, विचित्र आदि प्रमुख वीर अपने-अपने स्थान ग्रहण करते हैं। तभी दमन पुनर्जीवित होकर गर्वपूर्ण वाणी में चुनौती देता है। सुभाहु दुर्जेय ‘क्रौञ्च’ व्यूह रचने की आज्ञा देता है; नाम लेकर स्थान-निर्धारण के साथ उसे सावधानी से सजाया जाता है, ताकि शत्रुघ्न की सेनाओं से होने वाले महासंघर्ष की तैयारी पूर्ण हो सके।

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