
The Victory of Puṣkala (Aśvamedha Battlefield Episode)
अश्वमेध के घोड़े के छीने जाने का समाचार सुनकर शत्रुघ्न क्रोध से भरकर उस रणभूमि की ओर दौड़ पड़े, जहाँ टूटे हुए दलों और पशुओं से भयानक दृश्य फैला था। वहाँ सुभाहु का पुत्र दमन (दमनक) महान अश्व-प्रशिक्षक और शत्रु-संहारक वीर के रूप में सामने आया। भरतपुत्र पुष्कल ने उसे पराजित करने की प्रतिज्ञा की और सेना सहित आगे बढ़ा। मंत्रबल से संचालित अस्त्रों का घोर प्रतिघात हुआ—अग्न्यस्त्र को वरुण के जल ने शांत किया, वाय्वस्त्र को पर्वतास्त्र ने रोक दिया, और वज्र-सदृश प्रहार से एक राजकुमार गंभीर रूप से घायल होकर पीछे हट गया। यद्यपि पुष्कल की स्थिति प्रबल थी, फिर भी उसने श्रीराम की आज्ञा स्मरण कर आगे का आक्रमण रोक दिया और विजय को केवल बल नहीं, धर्म-नियमित आचरण से जुड़ा बताया। अंत में जय-जयकार हुई और शत्रुघ्न ने आनंदित होकर पुष्कल की प्रशंसा की।
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