Adhyaya 23
Patala KhandaAdhyaya 230

Adhyaya 23

Account of the Battle of the Princes

राम-अश्वमेध के प्रसंग में पत्र-चिह्नित यज्ञाश्व, यक्ष-चामर से सेवित, शत्रुघ्न और सहायक वीरों की रक्षा में वेग से विचरता है। सुभाहु की वंश-परंपरा से जुड़े नगर में राजकुमार दमन उसे पकड़कर बाँध लेता है; इससे क्षत्रिय-धर्मानुसार संघर्ष का कारण बनता है। दूतों और गुप्तचरों से अश्व-ग्रहण का समाचार मिलते ही सेनाएँ सज्ज हो जाती हैं। दमन और प्रतापाग्र्य के बीच घोर युद्ध छिड़ता है—हाथियों, रथों, घुड़सवारों और पैदल दलों के बीच बाण-वर्षा के साथ पुराणोचित रण-वर्णन होता है। अंत में दमन एक प्रज्वलित निर्णायक अस्त्र छोड़ता है, जिससे प्रतापाग्र्य गिर पड़ता है और उसके लोग उसे उठाकर ले जाते हैं। शत्रु-सेना टूटकर शत्रुघ्न की ओर हटती है; दमन विजयी होकर शत्रुघ्न के आगमन की प्रतीक्षा करता है, जिससे अगले संघर्ष की भूमिका बनती है।

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