Adhyaya 117
Patala KhandaAdhyaya 1170

Adhyaya 117

Rama’s Liberation (Ritual Dharma, Atithi-Test, and Śiva’s Revelation)

अध्याय 117 की शुरुआत आश्रम और निवास-स्थानों के मनोहर वर्णन से होती है। इसके बाद श्रीराम भगवान शंकर से शुद्ध पूजा-विधि और अशुद्ध/अधर्म से प्राप्त सामग्री से किए गए अर्पण के कर्मफल का उपदेश माँगते हैं। शिव जी आकथा–सुशोभना, रूपक–सम्पाति तथा गण-उत्पत्ति से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से बताते हैं कि पूजन केवल धर्मपूर्वक अर्जित और निर्मल द्रव्यों से ही करना चाहिए; दूषित सामग्री से किया गया उपासना-कर्म दोषकारक होता है। मुख्य कथा में श्रीराम कौसल्या के मासिक श्राद्ध का अनुष्ठान करते हैं। तभी एक वृद्ध, अत्यन्त मांगलिक अतिथि आकर विधि में विघ्न डालता है और कठोर माँगों द्वारा अतिथि-धर्म की चरम परीक्षा लेता है। अंत में वह अतिथि स्वयं शिव के रूप में प्रकट होता है; पार्वती अक्षय अन्न प्रकट कर ‘अन्नदान’ की महिमा दिखाती हैं और देव-तृप्ति का संकेत देती हैं। अध्याय के अंत में शिव–राघव संवाद के श्रवण-पाठ का पुण्य तथा पुराण-वाचक को दान देने की प्रशंसा कही गई है।

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