Adhyaya 107
Patala KhandaAdhyaya 1070

Adhyaya 107

The Greatness of Sacred Ash: Vīrabhadra Revives Gods and Sages

शुचिस्मिता पूछती है कि पवित्र भस्म ने कश्यप, जमदग्नि और देवताओं की रक्षा कैसे की। दधीचि बताते हैं कि शोकर पर्वत पर एक भयंकर अग्नि प्रकट हुई, जिसने ऋषियों और देवों को जला कर भस्म कर दिया। तब वीरभद्र वहाँ आए, अग्नि से सामना किया और भारती/सरस्वती के उपदेश से उसे वश में किया; फिर भस्म और मृत्युञ्जय मंत्र के द्वारा सब गिरे हुए देव-ऋषियों को पुनर्जीवित कर दिया। इसके बाद भी संकट समाप्त नहीं होता—एक विशाल नाग और एक शक्तिशाली राक्षस पुनर्जीवित जनों को सताने लगते हैं। राक्षस की तपस्या के बीच शिव उसे वर देते हैं, पर अंततः उसके अहंकार का नाश होकर उसका पराभव होता है और सबकी रक्षा पुनः स्थापित होती है। अध्याय के अंत में वीरभद्र-स्मरण का जप-विधान बताया गया है, जो राक्षस, ब्रह्मराक्षस और पिशाच-पीड़ा को दूर करता है; फलश्रुति में भस्म को आयुवर्धक और पापनाशक कहा गया है।

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