Adhyaya 101
Patala KhandaAdhyaya 1010

Adhyaya 101

Glorification of the Month of Vaiśākha (Mādhava): Dawn Bathing, Compassion, and Release from Sin

इस अध्याय में विषय-भोग में लिप्त एक राजा काल की दृष्टि से मृत्यु को प्राप्त होकर यमदूतों द्वारा पकड़ा जाता है और अपने पापों पर विलाप करता है। तभी विष्णु के दूत आकर उसे धर्मात्मा बताते हैं और हरि-धाम की ओर ले चलने लगते हैं; कहा जाता है कि वैशाख में प्रातःकाल स्नान करने से उसके पाप क्षीण हो गए। परन्तु भगवान् विष्णु की आज्ञा से वे दूत उसे नरक-मार्ग के निकट ले जाते हैं, जहाँ नरक में पकते प्राणियों की भयानक चीखें सुनाई देती हैं। दूत पापियों की दुर्गति, अधर्म से पतन, निषिद्ध कर्मों—विशेषतः परस्त्रीगमन—और नरक की विविध यातनाओं का वर्णन करते हैं। राजा का हृदय करुणा से भर उठता है; वह दूसरों के दुःख में वृद्धि नहीं चाहता और सज्जन-हृदय की कोमलता की प्रशंसा करता है। अंत में वैशाख-व्रत का सार—प्रभात स्नान और विष्णु-पूजन—पापराशि को भस्म करने वाला बताकर राजा की मुक्ति का कारण घोषित किया जाता है।

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