
The Greatness of the Droplets of the Gaṅgā
इस अध्याय में गङ्गा-माहात्म्य का स्तुतिपूर्वक वर्णन है—गङ्गा का नाम-स्मरण, दर्शन, स्नान, तट की रेत या जल की एक बूंद का स्पर्श भी पापों का नाश कर मोक्ष देता है; इसे तप और यज्ञों से भी श्रेष्ठ कहा गया है। फिर त्रेता-युग की कथा आती है। धर्मस्व नामक धर्मपरायण ब्राह्मण गङ्गा के पास जाकर मुक्ति की प्रार्थना करता है। उसी समय कालकल्प नामक घोर पापी, बैल पर क्रूरता आदि पापों के कारण भयंकर मृत्यु को प्राप्त होता है; धर्मस्व करुणावश उसे गङ्गाजल से छिड़क देता है। यमदूत उसे पकड़ने आते हैं, पर विष्णुदूत प्रकट होकर कहते हैं कि गङ्गा की बूंदें समस्त पाप हर लेती हैं और वह हरि-धाम के योग्य हो गया है। संघर्ष के बाद यमदूत भाग जाते हैं; कालकल्प वैकुण्ठ ले जाया जाता है और अंततः परम मुक्ति पाता है। धर्मस्व गङ्गा की स्तुति कर यह वर पाता है कि वह गङ्गा-जल में देह त्यागते समय गङ्गा-नाम का स्मरण कर परम गति को प्राप्त होगा।
No shlokas available for this adhyaya yet.