Adhyaya 5
Kriyayoga SaraAdhyaya 50

Adhyaya 5

Exposition of Vīravara (Virtue Tested by Desire, Fate, and Strategy)

तāladhvajā नगर में राजा विक्रम और रानी हारावती के पुत्र माधव विद्वान् युवराज बनते हैं। शिकार के समय वह स्नान करती चन्द्रकला को देखकर कामवश हो उठता है और अपहरण का विचार करता है; तभी कथा में तीखी नीति कही जाती है कि ऐश्वर्य, मद और काम विवेक का नाश करते हैं, और पर-स्त्रीगमन घोर अधर्म है। चन्द्रकला उसे रोककर समुद्र-पार दूर नगर की राजकुमारी सुलोचना का संकेत, पहचान-चिह्न और वहाँ जाने का उपाय बताती है। माधव समुद्र पार कर गन्धिनी को मध्यस्थ बनाकर सुलोचना से पत्र-व्यवहार करता है। सुलोचना शर्त रखती है कि सार्वजनिक परिक्रमा के बाद जो उसे ‘ले जा सके’ वही उसका पति होगा। पर दैववश माधव के सो जाने पर उसका सेवक प्रचेष्ट सुलोचना का अपहरण कर उसे फुसलाना चाहता है; सुलोचना विवाह-सामग्री लाने के बहाने उसे भेजकर बुद्धि से निकल भागती है। अंत में वह एक पवित्र संगम पर पहुँचकर माया से पुरुष-रूप धारण करती है और “वीरवर” नाम से राजा सुसेण की सभा में प्रवेश करती है, जिससे आगे की कथा का क्रम बनता है।

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