Adhyaya 4
Kriyayoga SaraAdhyaya 40

Adhyaya 4

Description of Prayāga (Glory of the Sacred Confluence and Māgha Observances)

जैमिनि, गंगाद्वार का माहात्म्य सुनकर, व्यास से प्रयाग की महिमा पूछते हैं। व्यास संक्षेप में तीर्थ-माहात्म्य बताते हैं—त्रिवेणी-संगम देवताओं द्वारा वंदित है; माघ-स्नान, विशेषतः मकर-सूर्य के समय, अतुल पुण्य देने वाला और वैकुण्ठ-प्राप्ति कराने वाला है, जो प्रसिद्ध दानों और यज्ञों से भी बढ़कर है। फिर उपदेशात्मक कथा आती है—धनवान वैश्य प्रणिधि और उसकी पतिव्रता पत्नी पद्मावती के प्रसंग में एक पापी व्यक्ति उसे बहकाने का प्रयास करता है, पर संगम पर मृत्यु पाकर अद्भुत रूप से शुद्ध हो जाता है। पद्मावती के स्तोत्र से माधव प्रकट होकर “दो पतियों” के धर्म-संकट का समाधान करते हैं और वैकुण्ठ-गमन का वर देते हैं। मार्ग में विष्णुदूत बताते हैं कि गंगा-सागर संगम पर मरने वाले घोर पापी भी परम गति को प्राप्त होते हैं। अंत में अगले प्रसंग हेतु राजा माधव की तपस्या का संकेत दिया जाता है।

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