
Duties of the Ages and the Description of Kali-yuga, with the Merit of Hari-Nāma and Offering Actions to Viṣṇu
जैमिनि ने व्यास से पूछा कि जब कठोर कलियुग आएगा तब लोग कैसे आचरण करेंगे। व्यास ने सत्ययुग के गुण बताए—सत्य, करुणा, आरोग्य और नारायण-भक्ति; फिर त्रेता और द्वापर में धर्म का क्रमशः ह्रास, और अंत में कलि में नैतिक उलटाव का वर्णन किया। कलियुग में कामना, क्रूरता, कपट, चोरी, पाखंडी संगति और वर्ण-आश्रम के कर्तव्यों में भ्रम बढ़ता है। फिर व्यास उपाय बताते हैं—कलि के दोषों के बीच भी साधना का फल शीघ्र मिलता है। विशेषकर हरि-नाम का जप-कीर्तन और भक्ति से किए गए समस्त कर्मों को महाविष्णु को अर्पित करना महान पुण्य और सिद्धि देता है। अंत में फलश्रुति है कि इस उपदेश का पाठ, श्रवण, लेखन या पूजन करने से संचित पाप नष्ट होते हैं, इच्छित फल मिलते हैं और श्रीपति की कृपा से मोक्ष प्राप्त होता है।
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