
The Glory of Ekādaśī: Sin, Food-Taboo, Vigil, and the Complete Vrata Procedure
इस अध्याय में शिष्य एकादशी के सम्पूर्ण फल, विधि, समय और आराध्य देवता को जानने की प्रार्थना करता है और इसे सर्वोच्च व्रत कहा गया है। फिर कारण-कथा आती है—भगवान् पापपुरुष की सृष्टि करते हैं, नरकों की व्यवस्था करते हैं, यम के लोक में जाकर पापियों की यातना और करुण विलाप देखते हैं। दया से प्रेरित होकर नारायण एकादशी-तिथि के रूप में प्रकट होते हैं, जिससे पापी भी शुद्ध होकर परम धाम को प्राप्त होते हैं। पापपुरुष विनाश-भय से शरण मांगता है; तब विष्णु उसे एकादशी के दिन “अन्न में” निवास देते हैं—इसी से एकादशी पर अन्न/धान्य-निषेध का आधार बताया गया है। आगे व्रत-विधि विस्तार से दी गई है—दशमी के संयम और आहार-नियम, एकादशी को विष्णु-पूजन, जागरण, मंदिर में ध्वज-दीप-मण्डप-चित्र आदि सेवाएँ, शास्त्र-पाठ, पाखण्ड-वार्ता का त्याग, तथा द्वादशी को उचित समय पर पारण। विधिपूर्वक पालन करने पर मुक्ति का आश्वासन दिया गया है।
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