Adhyaya 10
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Adhyaya 10

Rites and Rewards of Worshipping Viṣṇu in Māgha Month (with the Campaka-Flower Exemplum)

इस अध्याय में जैमिनि व्यास से विष्णु-पूजा का फल पूछते हैं। तब माघ-मास की साधना-योजना बताई जाती है—मांस और मैथुन का त्याग, प्रातःकाल स्नान, सादा आहार, श्वेत वस्त्र, तथा पञ्चमहायज्ञ का पालन। अर्चना-विधि में भगवान को हल्के गरम जल से स्नान कराना, चन्दन का लेपन, पात्रों की शुद्धि, वस्त्र-समर्पण, शीत-निवारण हेतु धूमरहित अग्नि प्रज्वलित करना, और दूध व नारियल-जल से विशेष अभिषेक का विधान आता है। पञ्चमी और एकादशी आदि तिथियों की विशेष महिमा, तथा प्रतिदिन पायस आदि नैवेद्य अर्पण करने का फल कहा गया है; माघ में किए गए कर्मों को ‘अक्षय पुण्य’ देने वाला बताया गया है। फिर उपदेशात्मक कथा में पापी राजा सुवर्ण संयोगवश चम्पक-पुष्प अर्पित कर ‘ॐ नमो नारायणाय’ कह देता है; यमदूतों से उसे विष्णुदूत छुड़ाते हैं और भगवान नारायण उसे स्वीकार करते हैं—जिससे नाम-स्मरण और पुष्प-समर्पण की तारक शक्ति प्रकट होती है।

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