Virāṭa Rescued from Suśarmā; Night Battle and Royal Gratitude (विराटमोक्षणं सुशर्मवधाभिमुखं च)
तेषां समागमो घोरस्तुमुलो लोमहर्षण: । घ्नतां परस्परं राजन् यमराष्ट्रविवर्धन:,हाथियोंपर चढ़कर उन्हें चलानेमें कुशल श्रेष्ठ महावतोंद्वारा तोमरों और अंकुशोंकी मारसे आगे बढ़ाये हुए भयंकर और मतवाले गजराज दोनों ओरसे एक-दूसरेपर टूट पड़े। परस्पर शस्त्रोंका प्रहार करनेवाले हाथीसवारोंका वह कोलाहलपूर्ण भयंकर युद्ध रोंगटे खड़े कर देनेवाला एवं महासंहारकारी था
teṣāṁ samāgamo ghoras tumulo lomaharṣaṇaḥ | ghnatāṁ parasparaṁ rājan yamarāṣṭravivardhanaḥ ||
वैशम्पायन बोले— राजन्! उनका वह समागम अत्यन्त घोर, कोलाहलपूर्ण और लोमहर्षक था। वे जब निकट से एक-दूसरे को मार गिराते थे, तब वह संग्राम यमराज्य को बढ़ाने वाला बन जाता था—क्योंकि उसमें मृत्यु के लिए निरन्तर नये-नये प्राण समर्पित होते जाते थे।
वैशम्पायन उवाच