Virāṭa-parva Adhyāya 23: Report of the Slain Sūtaputras, Royal Orders, and Sairandhrī’s Return
ददृशुस्ते ततः कृष्णां सूतपुत्रा: समागता: । अदूराच्चानवद्याड़ीं स्तम्भमालिड़य तिष्ठतीम्,इसी समय वहाँ आये हुए सूतपुत्रोंने देखा, निर्दोष अंगोंवाली द्रौपदी थोड़ी ही दूरपर एक खंभेका सहारा लिये खड़ी है
dadṛśus te tataḥ kṛṣṇāṃ sūtaputrāḥ samāgatāḥ | adūrāc cānavadyāṅgīṃ stambham āliḍya tiṣṭhatīm ||
तब वहाँ एकत्र हुए सूतपुत्रों ने कृष्णा (द्रौपदी) को देखा। वह निर्दोष अंगोंवाली नारी थोड़ी ही दूर पर एक खंभे का सहारा लिये खड़ी थी।
वैशम्पायन उवाच