Virāṭa-parva Adhyāya 13 — Kīcaka’s Proposition and Draupadī’s Dharmic Refusal
नोद्यमानस्तदा भीमो दुःखेनैवाकरोन्मतिम् | न हि शक्नोति विवृते प्रत्याख्यातुं नराधिपम्,उस समय राजासे प्रेरित होनेपर भीमसेनने [पहचाने जानेके भयसे] दुःखी होकर ही उससे लड़नेका विचार किया। वे राजाकी बातको प्रकटरूपमें टाल नहीं सकते थे
nodyamānas tadā bhīmo duḥkhenaivākaron matim | na hi śaknoti vivṛte pratyākhyātuṃ narādhipam ||
उस समय राजा के उकसाने पर भी भीमसेन ने—पहचाने जाने के भय से—दुःखी मन से ही युद्ध करने का निश्चय किया; क्योंकि वे नराधिप के आदेश को खुले रूप से टाल नहीं सकते थे।
वैशम्पायन उवाच