Avanti–Narmadā–Puṣkara Tīrtha-Kathana (धौम्यकथितं तीर्थवर्णनम्)
यत्रानुवंशं भगवाञ्जामदग्न्यस्तथा जगौ । विश्वामित्रस्य तां दृष्टवा विभूतिमतिमानुषीम्,'उसी यज्ञमें विश्वामित्रका अलौकिक वैभव देखकर जमदग्निनन्दन परशुरामने उनके वंशके अनुरूप यशका वर्णन किया था
yatrānvaṁśaṁ bhagavāñ jāmadagnyas tathā jagau | viśvāmitrasya tāṁ dṛṣṭvā vibhūtim atimānuṣīm ||
वहीं भगवान् जामदग्न्य (परशुराम) ने विधिपूर्वक उनके वंश का वर्णन किया; और उस यज्ञ में विश्वामित्र का अलौकिक वैभव देखकर, वंश के अनुरूप उनके यश का प्रतिपादन किया।
वैशम्पायन उवाच