कलेर्द्वापरस्य च नले प्रति कोपः
Kali and Dvāpara’s Resolve Against Nala
तस्य दृष्टवैव ववृधे कामस्तां चारुहासिनीम् । सत्यं चिकीर्षमाणस्तु धारयामास हृच्छयम्,उस मनोहर मुसकानवाली राजकुमारीको देखते ही नलके हृदयमें कामाग्नि प्रज्वलित हो उठी; तथापि अपनी प्रतिज्ञाको सत्य करनेकी इच्छासे उन्होंने उस कामवेदनाको मनमें ही रोक लिया
उस मनोहर हास्यवाली राजकुमारी को देखते ही नल के हृदय में काम बढ़ उठा; परन्तु प्रतिज्ञा को सत्य करने की इच्छा से उन्होंने उस हृदयगत वेदना को भीतर ही धारण कर लिया।
बृहृदश्च उवाच