Bhīmasena’s Discourse on Kāla, Resolve, and the Feasibility of Ajñātavāsa (भीमसेनस्य कालोपदेशः)
तत्र ते न्यवसन् राजन् किंचित् कालं मनस्विनः । धनुर्वेदपरा वीरा: शृण्वन्तो वेदमुत्तमम्,राजन! वहाँ धनुर्वेदके अभ्यासमें तत्पर हो उत्तम वेदमन्त्रोंका उद्घोष सुनते हुए उन मनस्वी पाण्डवोंने कुछ कालतक निवास किया
tatra te nyavasan rājan kiñcit kālaṁ manasvinaḥ | dhanurvedaparā vīrāḥ śṛṇvanto vedam uttamam ||
राजन्! वहाँ वे मनस्वी वीर कुछ समय तक रहे—धनुर्वेद के अभ्यास में तत्पर और उत्तम वेदमंत्रों के पाठ का श्रवण करते हुए।
वैशम्पायन उवाच