सा तु कौतूहलात प्राप्तां ग्राहयामास भाविनी । ततो निवेदयामास सूतस्याधिरथस्य वै
sā tu kautūhalāt prāptāṃ grāhayāmāsa bhāvinī | tato nivedayāmāsa sūtasyādhirathasya vai ||
कौतूहलवश उस साध्वी ने आई हुई पिटारी को सेवकों से उठवाकर अपने पास मँगाया। तत्पश्चात उसने सूत अधिरथ को यह बात निवेदित की।
वैशम्पायन उवाच