Dyumatsena’s Restoration and Sāvitrī’s Disclosure of Yama’s Boons (आरण्यकपर्व, अध्याय २८२)
पुत्रो5हमपि विप्रषें: साक्षाद् विश्रवसो मुने: । पडञ्चमो लोकपालानामिति मे प्रथितं यश:,“मैं भी कुबेरके ही समान साक्षात् ब्रह्मर्षि विश्रवा मुनिका पुत्र हूँ। (इन्द्र, यम, वरुण और कुबेर--इन चार लोकपालोंके सिवा) पाँचवें लोकपालके रूपमें मेरा सुयश सर्वत्र फैला हुआ है
putro 'ham api viprarṣeḥ sākṣād viśravaso muneḥ | pañcamo lokapālānām iti me prathitaṃ yaśaḥ ||
मार्कण्डेय बोले—हे ब्रह्मर्षि! मैं भी साक्षात् मुनि विश्रवा का पुत्र हूँ। इन्द्र, यम, वरुण और कुबेर—इन चार लोकपालों के अतिरिक्त ‘पाँचवें लोकपाल’ के रूप में मेरा यश सर्वत्र प्रसिद्ध है।
मार्कण्डेय उवाच