Duryodhana Seized by Citraseṇa; Kaurava Petition to Yudhiṣṭhira (दुर्योधनापहारः / चित्रसेनगन्धर्वग्रहणम्)
मार्कण्डेय उवाच विवक्षन्तं तत: शक्रं कि कार्यमिति सो<ब्रवीत् । उक्तः स्कन्देन ब्रूहीति सोडब्रवीद् वासवस्तत:,मार्कण्डेयजी कहते हैं--राजन्! तदनन्तर इन्द्रको कुछ कहनेके लिये उत्सुक देख स्कन्दने पूछा--'क्या काम है, कहिये।” स्कन्दके इस प्रकार आदेश देनेपर इन्द्र बोले --
Mārkaṇḍeya uvāca: vivakṣantaṃ tataḥ Śakraṃ kiṃ kāryam iti so ’bravīt | uktaḥ Skandena brūhīti so ’bravīd Vāsavas tataḥ ||
मार्कण्डेय बोले—तदनन्तर शक्र (इन्द्र) को कुछ कहने के लिए उत्सुक देखकर स्कन्द ने पूछा—“क्या कार्य है? कहो।” स्कन्द के ऐसा कहने पर वासव (इन्द्र) वहाँ बोले।
मार्कण्डेय उवाच