Duryodhana Seized by Citraseṇa; Kaurava Petition to Yudhiṣṭhira (दुर्योधनापहारः / चित्रसेनगन्धर्वग्रहणम्)
स्कन्द उवाच मातरो हि भवत्यो मे सुतो वो5हमनिन्दिता: । यद्वापीच्छत तत् सर्व सम्भविष्यति वस्तथा,स्कन्द बोले--वन्दनीय सतियो! आपलोग मेरी माताएँ हैं और मैं आप सबका पुत्र हूँ। इसके सिवा यदि आप लोगोंकी और कोई इच्छा हो तो वह भी पूर्ण हो जायगी
Skanda uvāca: mātarō hi bhavatyō me suto vo ’ham aninditāḥ | yad vāpy īcchata tat sarvaṃ sambhaviṣyati vaḥ tathā ||
स्कन्द बोले—“अनिन्द्य वन्दनीया माताओ! आप सब मेरी माताएँ हैं और मैं आप सबका पुत्र हूँ। इसके अतिरिक्त आपकी जो भी इच्छा होगी, वह भी अवश्य पूर्ण होगी।”
स्कन्द उवाच