Gandhamādana-praveśa and the Sudden Storm (गन्धमादनप्रवेशः — चण्डवातवर्षवर्णनम्)
दशवर्षसहस््त्राणि तपस्तप्यन् महामना: । ऐन्द्रं प्रार्थयते स्थानं तप:स्वाध्यायविक्रमात्,“वह महामना दैत्य दस हजार वर्षोतक कठोर तपस्या करके तप, स्वाध्याय और पराक्रमसे इन्द्रका स्थान लेना चाहता था
daśavarṣasahasrāṇi tapastapyan mahāmanāḥ | aindraṃ prārthayate sthānaṃ tapaḥsvādhyāyavikramāt ||
वह महामना दैत्य दस हजार वर्षों तक तप करता रहा और तप, स्वाध्याय तथा पराक्रम के बल से इन्द्र का पद प्राप्त करना चाहता था।
लोगश उवाच