मैत्रेयागमनम् — The Arrival of Maitreya and the Admonition to Duryodhana
इत:ः प्रयाता राजेन्द्र पाण्डवा द्यूतनिर्जिता: । जम्मुस्त्रिभिरहोरात्रै: काम्यकं नाम तद् वनम्,राजेन्द्र! पाण्डव जूएमें पराजित होकर जब यहाँसे गये, तब तीन दिन और तीन रातमें काम्यकवनमें जा पहुँचे
itaḥ prayātā rājendra pāṇḍavā dyūtanirjitāḥ | jagmuḥ tribhir ahorātraiḥ kāmyakaṃ nāma tad vanam ||
विदुर बोले— राजेन्द्र! पाण्डव जुए में पराजित होकर यहाँ से चले गए और तीन दिन-तीन रात में ‘काम्यक’ नामक वन में जा पहुँचे।
विदुर उवाच