Dambhodbhava, Nara-Nārāyaṇa, and the Counsel to Abandon Hubris
Udyoga-parva 94
स्वयं निष्फलमालक्ष्य संविधत्स्व विशाम्पते । सहायभूता भरतास्तवैव स्युर्जनेश्वर
हे प्रजानाथ, जनेश्वर! पाण्डवों के साथ वैर-विवाद का कोई शुभ परिणाम नहीं हो सकता—यह स्वयं समझकर आप ही संधि के लिए प्रयत्न कीजिए। ऐसा करने पर भरतवंशी पाण्डव आपके ही सहायक होंगे।
वैशम्पायन उवाच