विदुरस्य कृष्णं प्रति शमोपदेशः
Vidura’s Counsel to Krishna on the Limits of Peace
विविधास्तरणास्तीर्णमभ्युपाविशदच्युत: । उस राजसभामें सुन्दर रत्नोंसे विभूषित एक सुवर्णमय पर्यक रखा हुआ था, जिसपर भाँति-भाँतिके बिछौने बिछे हुए थे। भगवान् श्रीकृष्ण उसीपर विराजमान हुए ।। ८ ह ।। तस्मिन् गां मधुपर्क चाप्युदकं च जनार्दने
vaśaṃpāyana uvāca | vividhāstaraṇāstīrṇam abhyupāviśad acyutaḥ | tasmin rājāsabhāyāṃ sundara-ratnaiḥ vibhūṣitaḥ suvarṇamayaḥ paryaṅkaḥ sthāpita āsīt, yasmin nānāvidhāni śayanāni tīrṇāni āsan | bhagavān śrīkṛṣṇas tasminn eva virājām āsa || tasmin gāṃ madhuparkaṃ cāpy udakaṃ ca janārdane ||
वैशम्पायन बोले—अच्युत श्रीकृष्ण अनेक प्रकार के बिछौनों से आच्छादित उस पर्यंक पर विराजमान हुए। उस राजसभा में सुन्दर रत्नों से विभूषित एक सुवर्णमय पलंग रखा था, जिस पर भाँति-भाँति के शयनास्तरण बिछे थे; उसी पर भगवान् श्रीकृष्ण शोभायमान हुए। तब जनार्दन के सत्कार हेतु—अतिथि-धर्म के अनुसार—गाय, मधुपर्क और जल लाया गया।
वैशम्पायन उवाच