Kṛṣṇa at Duryodhana’s House: Refusal of Hospitality and Departure to Vidura (कृष्णस्य धार्तराष्ट्रनिवेशनगमनम्)
न हि वैरं समासाद्य प्रशाम्यति वृकोदर: | सुचिरादपि भीमस्य न हि वैरं प्रशाम्यति । यावदन्तं न नयति शात्रवाउछत्रुकर्शन:
वृकोदर भीमसेन वैर हो जाने पर कभी शान्त नहीं होता। बहुत समय बीत जाने पर भी उसका वैर तब तक नहीं मिटता, जब तक शत्रुनाशक भीम शत्रुओं का अन्त न कर दे।
वैशम्पायन उवाच