अम्बाया रामजामदग्न्यशरणगमनम्
Ambā Seeks Refuge with Rāma Jāmadagnya
अकृतव्रण उवाच उपपन्नमिदं भद्रे यदेवं वरवर्णिनि । धर्म प्रति वचो ब्रूया: शृणु चेद॑ वचो मम,अकृतब्रण बोले--भट्रे! तुम जो इस प्रकार धर्मानुकूल बात कहती हो, यही तुम्हारे लिये उचित है। वरवर्णिनि! अब मेरी यह बात सुनो
Akṛtavraṇa uvāca: upapannam idaṃ bhadre yad evaṃ varavarṇini | dharmaṃ prati vaco brūyāḥ śṛṇu cedam vaco mama ||
अकृतव्रण बोले—भद्रे! वरवर्णिनि! तुमने जो इस प्रकार धर्मानुकूल वचन कहा है, वह सर्वथा उचित और संगत है। अब मेरी यह बात सुनो।
अकृतव्रण उवाच