Adhyāya 152: Kaurava-sainyavibhāgaḥ
Division and Standardization of the Kaurava Host
तदुत्सव इवोदग्रं सम्प्रहृष्टनरावृतम् । नगर धार्तराष्ट्स्य भारतासीत् समाकुलम्,जनमेजय! दुर्योधनका वह हस्तिनापुर नगर मानो वहाँ कोई उत्सव हो रहा हो, इस प्रकार समृद्ध और हर्षोत्फुल्ल मनुष्योंसे भर गया था, इससे वहाँ बड़ी हलचल मच गयी थी
tad utsava ivodagraṃ samprahṛṣṭa-narāvṛtam | nagaraṃ dhārtarāṣṭrasya bhāratāsīt samākulam, janamejaya ||
हे जनमेजय! धार्तराष्ट्रों का वह नगर उत्सव-सा उल्लसित हो उठा; हर्षित मनुष्यों से भरकर वह अत्यन्त समाकुल और कोलाहलमय हो गया।
वैशम्पायन उवाच