Mātali’s Proposal for Guṇakeśī and Sumukha’s Audience with Indra
श्वेताचलनिभाकारो दिव्याभरणभूषित: । सहसत धारयन् मूर्थ्ना ज्वालाजिह्दो महाबल:,भगवान् शेषका शरीर कैलास पर्वतके समान श्वेत है। ये सहख्न मस्तक धारण करते हैं। इनकी जिह्ला अग्निकी ज्वालाके समान जान पड़ती है। ये महाबली अनन्त दिव्य आभूषणोंसे विभूषित होते हैं
śvetācalanibhākāro divyābharaṇabhūṣitaḥ | sahasraśīrṣaṃ dhārayan mūrdhnā jvālājihvo mahābalaḥ ||
नारद बोले—वह श्वेत पर्वत के समान दीप्तिमान है और दिव्य आभूषणों से विभूषित है। मस्तक पर सहस्र शिर धारण किए हुए, अग्नि-ज्वाला के समान जिह्वा वाला, वह अत्यन्त महाबली है।
नारद उवाच