Mātali’s Proposal for Guṇakeśī and Sumukha’s Audience with Indra
एष शेष: स्थितो नागो येनेयं॑ धार्यते सदा । तपसा लोकमुख्येन प्रभावसहिता मही,ये शेषनाग स्थित हैं, जो अपने लोकप्रसिद्ध तपोबलसे प्रभावसहित इस सारी पृथ्वीको सदा सिरपर धारण करते हैं
eṣa śeṣaḥ sthito nāgo yeneyaṁ dhāryate sadā | tapasā lokamukhyena prabhāvasahitā mahī ||
नारद बोले—यह शेषनाग हैं, जो स्थिर होकर सदा इस पृथ्वी को धारण करते हैं। अपने लोक-प्रसिद्ध, श्रेष्ठ तप के प्रभाव से यह पृथ्वी तेजस्विता सहित स्थिर रहती है।
नारद उवाच