स्त्री-विलापः — गान्धार्याः रणभूमिदर्शनं शापवचनं च
Battlefield Lament and Gāndhārī’s Curse
आसामायतलनेत्राणां सुस्वराणां जनार्दन । मन:श्रुतिहरो नादो मनो मोहयतीव मे,श्रीकृष्ण! मधुर स्वरवाली इन विशाललोचना रानियोंका मन और कानोंको मोह लेनेवाला आर्तनाद मेरे मनको मूर्च्छित-सा किये देता है
āsām āyata-locanānāṃ su-svarāṇāṃ janārdana | manaḥ-śruti-haro nādo mano mohayatīva me ||
वैशम्पायन बोले—हे जनार्दन! इन विशाललोचना, मधुरस्वरा रानियों का जो आर्तनाद उठ रहा है, वह मन और कानों को हर लेनेवाला है; मानो मेरे मन को ही मोह-मूर्च्छित कर देता है।
वैशम्पायन उवाच