स्त्रीपर्व — गान्धारीविलापः
Strī Parva — Gāndhārī’s Lament over the Fallen
युवा वृन्दारक: शूरो विकर्ण: पुरुषर्षभ । सुखोषित: सुखार्हश्च शेते पांसुषु माधव,पुरुषप्रवर माधव! विकर्ण नवयुवक, देवताके समान कान्तिमान्, शूरवीर, सुखमें पला हुआ तथा सुख भोगनेके ही योग्य था; परंतु आज धूलमें लोट रहा है
yuvā vṛndārakaḥ śūro vikarṇaḥ puruṣarṣabha | sukhoṣitaḥ sukhārhaś ca śete pāṃsuṣu mādhava ||
पुरुषप्रवर माधव! विकर्ण नवयुवक, देवता के समान कान्तिमान, शूरवीर, सुख में पला हुआ और सुख भोगने के ही योग्य था; परन्तु आज धूल में लोट रहा है।
वैशम्पायन उवाच