स्त्रीपर्व — गान्धारीविलापः
Strī Parva — Gāndhārī’s Lament over the Fallen
अस्य भार्या5<मिषप्रेप्सून् गृध्रकाकांस्तपस्विनी । वारयत्यनिशं बाला न च शकनोति माधव,माधव! उसकी तपस्विनी पत्नी जो अभी बालिका है, मांसलोलुप गीधों और कौओंको हटानेकी निरन्तर चेष्टा करती है; परंतु सफल नहीं हो पाती है
asya bhāryā māṁsa-prepsūn gṛdhra-kākāṁs tapasvinī | vārayaty aniśaṁ bālā na ca śaknoti mādhava mādhava ||
माधव! इसकी तपस्विनी पत्नी, जो अभी बालिका ही है, मांस के लोभी गीधों और कौओं को निरन्तर हटाने का प्रयत्न करती रहती है; परन्तु वह सफल नहीं हो पाती।
वैशम्पायन उवाच