आयोधनदर्शनम्
Viewing the Battlefield of Kurukṣetra
अवध्यकल्पान् निहतान् गतसत्त्वानचेतस: । गृधप्रकडुकवटश्येनश्वशृूगालादनीकृतान्,“जो अवध्य समझे जाते थे, वे भी मारे गये और अचेत एवं प्राणशून्य होकर यहाँ पड़े हैं। गीध, कंक, बटेर, बाज, कुत्ते और सियार उन्हें अपना आहार बना रहे हैं
avadhyakalpān nihatān gatasattvān acetasaḥ | gṛdhaprakaḍukavaṭaśyenaśvaśṛgālādanīkṛtān ||
जो अवध्य समझे जाते थे, वे भी मारे गए; अब अचेत और प्राणहीन होकर यहाँ पड़े हैं। गीध, कंक, बटेर, बाज, कुत्ते और सियार उन्हें अपना आहार बना रहे हैं।
वैशम्पायन उवाच