आयोधनदर्शनम्
Viewing the Battlefield of Kurukṣetra
जयद्रथस्य कर्णस्य तथैव द्रोणभीष्मयो: । अभिमन्योर्विनाशं च कश्चिन्तयितुमहति,“इस युद्धमें जयद्रथ, कर्ण, द्रोणाचार्य, भीष्म और अभिमन्यु-जैसे वीरोंका विनाश हो जायगा, यह कौन सोच सकता था?
jayadrathasya karṇasya tathaiva droṇabhīṣmayoḥ | abhimanyor vināśaṃ ca kaś cintayitum arhati ||
इस युद्ध में जयद्रथ, कर्ण, द्रोणाचार्य, भीष्म और अभिमन्यु जैसे वीरों का विनाश हो जाएगा—यह कौन सोच सकता था?
वैशम्पायन उवाच