Yuddha-yajña-vyākhyāna (The Battle as Sacrifice): Ambarīṣa–Indra Saṃvāda
हतस्य कर्तुमिच्छन्ति तस्य लोकान् शृणुष्व मे । युद्धमें मारे गये वीरके लिये उसके आत्मीयजन न तो स्नान करना चाहते हैं
युद्ध में मारे गए वीर के लिए उसके स्वजन न स्नान करना चाहते हैं, न अशौच के कर्म, न अन्नदान (श्राद्ध), न जलदान (तर्पण)। उसे जो लोक प्राप्त होते हैं, वे मुझसे सुनो।
अम्बरीष उवाच