Yuddha-yajña-vyākhyāna (The Battle as Sacrifice): Ambarīṣa–Indra Saṃvāda
शोणितोदा सुसम्पूर्णा दुस्तरा पारगैनरि: । हतनागमहानक्रा परलोकवहाशिवा
śoṇitodā susampūrṇā dustarā pāragair nṛbhiḥ | hatanāga-mahānakrā paralokavahā śivā ||
अम्बरीष ने कहा—रक्त-जल वाली वह नदी पूरी तरह भरी हुई है; घाट जानने वालों के लिए भी उसे पार करना कठिन है। उसमें महान् मगरमच्छ हैं, मरे हुए हाथी बिखरे पड़े हैं; वह प्राणियों को परलोक की ओर बहा ले जाती है—फिर भी (अपने भयावह कर्म में) उसे ‘शिवा’ अर्थात् ‘मंगलमयी’ कहा जाता है।
अम्बरीष उवाच